मंगलवार, 18 जुलाई 2017

मेरे वीर !

मेरे वीर !
आँसू देकर क्यों रोता है 
मैंने बोये शूल तेरे पथ 
प्रसून मुझे  तूँ क्यो बोता है 
हमने रोकी राह तुम्हारी 
हमने पुछे प्रश्न सतत 
पीर तुम्हारी  संग न था 
दर्द हमारे क्यों ढोता है 
निशा हमारी तमस हमारा 
झंझावात हमारे हैं 
पथ पथरीले नियति हमारी 
पथ दीपक क्यों सँजोता है -
उदय वीर सिंह 

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